Thursday, 8 May 2014

देख नौटंकी अपनी दुनिया की

देख नौटंकी अपनी दुनिया की
सर पे लगा के खटिया देख कितने किरदार नाच रहे हैं?
इनके अटपटे नाच को देख शिकायत ना करना,
वोह तोह तेरी ही धुन पे वार रहे हैं.
खिट पिट मत कर और फिर देख नौटंकी अपनी दुनिया की.

अरे आखिर कौन सी सियाही से माथे पे लकीर खीचता है?
नौटंकी का सारा मज़ा किरकिरा करता है
सर खुजला के होश की मदिरा जमा ले
नशे में होजा चूर और फिर देख नौटंकी अपनी दुनिया की

रंग चढ़ा ले हर किसम के और झाड़ ले कुछ अपने किरदारों पर
पर सोच ज़रूर लेना की आज किस किरदार पे कौन सा रंग चढ़ेगा
आज कौन मंच पे और कौन पर्दे के पीछे रहेगा
रंगीला होजा एक बार और फिर देख नौटंकी अपनी दुनिया की

ध्यान से देख जमा और घटा नौटंकी अपनी दुनिया की
क्यूंकी भले ही बना है तेरे लिए इसका शामियाना
लेकिन नापेगा मोल इसका सारा ज़माना

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