जब मैंने किस्सी से पूछा अँधेरा क्या होता है
इन सलाखों ने मुझे बता दिया
जब मैंने किस्सी से पूछा सन्नाटा क्या होता है
इस तन्हाई ने मुझे बता दिया
जब मैंने किस्सी से पूछा डर क्या होता है
हथेल्यों पे पढ़े निशानों ने मुझे बता दिया
जब मैंने किस्सी से पूछा माँ क्या होती है
उसके आँचल की याद ने मुझे बता दिया
जब मैंने किस्सी से पूछा कठिनाइयाँ क्या होती है
इन जंजीरों ने मुझे बता दिया
आखिरी बार जब मैंने किस्सी से पूछा ज़िन्दगी क्या होती है
कोठरी की खिड़की से आती सूरज की किरणों ने मुझे समझा दिया