
उस सुनसान रास्ते पर चलते हुए,
मुझे एक पत्थर मिला..उस पत्थर की गेंद बना कर,
मैंने तन्हाई के कुछ मूक पल गुज़ारे...
अचानक से.....
गोल गोल उलटता पटकता वोह पत्थर उन क़दमों में जा गिरा,
जो कदम इस सुनसान राह में अब मेरे हमराही बन गए हैं,
अब किसी पत्थर की ज़रूरत नहीं,
अब किसी चुप्पी का सहारा नहीं,
अब इन क़दमों को राह मिल गई है ऐसी,
जिस राह में यह दिल आवारा है तोह आवारा ही सही.
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