हाथ लगाओ तो गला पकड़ लेती है
इसको समझाना मुश्किल है
बहुत ही खुद्दार है, अपनी मनमानी करती है
ज्यादा फिक्र करो इसकी तो हाथ से छूटने लगती है
समझाने पर आफत बन पढ़ती है
ज़िन्दगी बहुत कमीनी है
शायद इतनी भी नहीं
चुपचाप अगर बैठो तो इसकी आवाज़ सुन सकोगे
शांत रह कर ही इसकी बात समझ पाओगे
फिर पता चलेगा की इस ज़िन्दगी को कमीना बनाने वाला आखिर कौन है.
खुद से पूछो.
हाथ लगाओ तो गला पकड़ लेती है
इसको समझाना मुश्किल है
बहुत ही खुद्दार है, अपनी मनमानी करती है
ज्यादा फिक्र करो इसकी तो हाथ से छूटने लगती है
समझाने पर आफत बन पढ़ती है
ज़िन्दगी बहुत कमीनी है
शायद इतनी भी नहीं
चुपचाप अगर बैठो तो इसकी आवाज़ सुन सकोगे
शांत रह कर ही इसकी बात समझ पाओगे
फिर पता चलेगा की इस ज़िन्दगी को कमीना बनाने वाला आखिर कौन है.
खुद से पूछो.
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