आँखों की बस्ती सपनो से भर गयी है
रात की चादर से इसकी छत ढक गयी है
छोटी सी कुटिया है आँखों की
लेकिन अनगिनत सपने बसे हैं इसमें
सपनो के रंगमंच पे आज क्या जादू दिखेगा
न जाने कौन सा किरदार मन के किस कोने से कब टपकेगा
होश की लालटेन जल बुझ रही है
क्यूंकि निंदिया हवा का झूला झूल रही है
आजा निंदिया बस जा इस बस्ती में
ले जा कहीं दूर सपनो की कश्ती में
रात की चादर से इसकी छत ढक गयी है
छोटी सी कुटिया है आँखों की
लेकिन अनगिनत सपने बसे हैं इसमें
सपनो के रंगमंच पे आज क्या जादू दिखेगा
न जाने कौन सा किरदार मन के किस कोने से कब टपकेगा
होश की लालटेन जल बुझ रही है
क्यूंकि निंदिया हवा का झूला झूल रही है
आजा निंदिया बस जा इस बस्ती में
ले जा कहीं दूर सपनो की कश्ती में
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