इस वक़्त को गुजरने दो ज़रावक़्त की साँसों को बड़ने दो ज़राज़िन्दगी इस वक़्त में गुज़र जाये नऐसे पागलपन से बचने दो ज़राक्या यही चाह रह गयी थीसब जान कर भी अनजान बन गयी थीजिन से हर पल का हिसाब रखते थेआज उनसे अलग अपनी पहचान बन गयी!
No comments:
Post a Comment