Monday, 8 February 2010

ख़ुशी किसे कहते हैं


जब सूरज की किरने पढ़ती हैं ओस पर
जब फूल खिलते हैं सूखी डाली पर
जब लहलहाती है खेत की हरियाली
जब कोयल गए बैठे डाली डाली
ख़ुशी इसे कहते हैं!

जब भूख में दे कोई अन्न का सहारा
प्यास में बहती नदी का किनारा
सुख में दे किरने उल्लास की
दुःख में उठाये नज़रें आस की
ख़ुशी इसे कहते हैं!
जब लक्ष्य हो पास तुम्हारा
और उसमें अनंत हर्ष का सहारा
धैर्य की चाबी थामें हाथो में
जब खोले सुनहरे दरवाज़े किस्मत के
ख़ुशी इसे कहते हैं!
बने वोह बुढ़ापे की लाठी
दो बातें जो उन लोगो से बाटी
देना अपना वक़्त उन पुराने नगमो को
जो अब भी याद करते हैं उन् पराये अपनों को
उनकी हस्सी में अपनी हस्सी शामिल करने को
मेरे दोस्त ख़ुशी इसे कहते हैं!

2 comments:

  1. Beautiful poem and a equally beautiful pic :

    Jahaan panah tussi great ho
    Tohfa kabool karo

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  2. जब सूरज की किरने पढ़ती हैं ओस पर
    जब फूल खिलते हैं सूखी डाली पर
    जब लहलहाती है खेत की हरियाली
    जब कोयल गए बैठे डाली डाली
    खुही इससे कहते हैं !

    जब भूख में दे कोई अन्न का सहारा
    प्यास में बहती नदी का किनारा
    सुख में दे किरने उल्लास की
    दुःख में उठाये नज़रें आस की
    ख़ुशी इससे कहते हैं !

    जब लक्ष्य हो पास तुम्हारा
    और उसमें अनंत हर्ष का सहारा
    धैर्य की चाबी थामें हाथो में
    जब खोले सुनहरे दरवाज़े किस्मत के
    ख़ुशी इससे कहते हैं !

    बने वोह बुढ़ापे की लाठी
    दो बातें जो उन लोगो से बाटी
    देना अपना वक़्त उन पुराने नगमो को
    जो अब भी याद करते हैं उन् पराये अपनों को
    उनकी हस्सी में अपनी हस्सी शामिल करने को
    मेरे दोस्त ख़ुशी कहते हैं !

    good poem... if its in Hindi then it shud be written in Hindi... :)

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