Friday, 26 February 2010


कहा था मैंने वक़्त को थम ना जाना

कहा था मैंने यादों को मत गुनगुनाना


आज सब कुछ जो माँगा था ज़िन्दगी से

वोह मिल रहा है धीमे धीमे से


न जाने कहाँ से एक हवा का झोंका आया

हज़ारों सपने अपने संग लाया


न जाने कहाँ से आई वोह रौशनी

जिसने भरी अँधेरी राहों में खुशी


न जाने कहाँ से आई वोह मुस्कराहट

जो छलकती है जब सुनती है उनकी आहात


न जाने कहाँ से आई वोह धुन

जो कहती है मुझसे 'अपने दिल की सुन'


न जाने कहाँ से आया है यह होसला

जो कराता है खुद से फैसला


न जाने कहाँ से आये हो तुम यहाँ

तुमने बना दिया है एक अलग ही जहाँ


पर इतना भला तोह जाना है इस सब से

यह रिश्ता तोह बनता है कुछ तुम से कुछ हम से

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