कहा था मैंने वक़्त को थम ना जाना
कहा था मैंने यादों को मत गुनगुनाना
आज सब कुछ जो माँगा था ज़िन्दगी से
वोह मिल रहा है धीमे धीमे से
न जाने कहाँ से एक हवा का झोंका आया
हज़ारों सपने अपने संग लाया
न जाने कहाँ से आई वोह रौशनी
जिसने भरी अँधेरी राहों में खुशी
न जाने कहाँ से आई वोह मुस्कराहट
जो छलकती है जब सुनती है उनकी आहात
न जाने कहाँ से आई वोह धुन
जो कहती है मुझसे 'अपने दिल की सुन'
न जाने कहाँ से आया है यह होसला
जो कराता है खुद से फैसला
न जाने कहाँ से आये हो तुम यहाँ
तुमने बना दिया है एक अलग ही जहाँ
पर इतना भला तोह जाना है इस सब से
यह रिश्ता तोह बनता है कुछ तुम से कुछ हम से
motivating :)
ReplyDelete