Thursday, 4 February 2010

एक दिन बन जाएगी हर बात

आज क्या नया है
क्यूँ छुपा हुआ है?
मेरे चेहरे की ख़ुशी के पीचे
कुछ दबा हुआ सा है.

हवाएं गुज़रती रहती हैं
घड़ी घड़ी उडती हुई यादें दिलाती हैं

इन हवाओं से लड़ना सीख लिया है मैंने
सांस रोक कर आगे बदना भी सीख लिया है मैंने
ज़िन्दगी ऐसे भी बताएगी अपनी पहचान
इस सोच को लिए करे थे बड़े एहसान
पर क्या थे उनके मायने
अब साफ़ साफ़ खड़े हैं मेरे सामने

ज़िन्दगी कम्बक्त है कम्बक्त ही रहेगी
हर पल ये सांसें यूँ ही चलती रहेंगी
तोह क्यूँ मूह फेरे उन रास्तों से
जहाँ किसी रोज़ खुशियाँ मिलती थी हर बातों में

आज चमक रहा है वोह आइना
जो बताता था क्या सही है और क्या सही था
एक हलकी सी मुस्कराहट छलकती है होटों से
जब याद आतें हैं वोह लम्हें
जब भरोसा नहीं था खुदी से

आज खुदी और खुदा दोनों है साथ....
बस कहते हैं मुझसे, मुस्कुराते रहना
देखना एक दिन बन जाएगी हर बात

3 comments:

  1. sunny days wouldn't be special, If it wasn't for rain.
    Joy wouldn't feel so good if it wasn't for pain :)
    Awesome written yaar too good :D

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  2. u certainly.. . moved far awei long. .
    tooooooooo gud. .!!
    n ha. .ek din baat banegi. :P... hehe. !!

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  3. u r right
    ek din ban jayegi har baat

    it's very nice.....

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