तुम हो कौन?जिसको याद करके मुस्कुराते हैं हमएक अजीब रिश्ता है तुमसेएक अजीब ख्वाइश जगाते हो तुमप्यार भरी नज़र से जब देखते हैं आपसब कुछ नज़र आता है साफ़ साफ़जैसे ही लफ्ज़ खुलते हैं चालकाने को अलफ़ाज़शब्दों की सुराही सूख जाती है बन के इक राज़तुम हो कौन जाने कब पता चलेगाक्या यह रिश्ता तब तक बना रहेगा?आज ख़ुशी कहती है हम सेकी यह मुस्कराहट जचती है तुम पेबस यूँ ही रहना मेरे पासऔर चेध्ते रहना वही प्यारा सा साज़तुम्हारी हर एक बात को सुनाने का है इंतज़ारअब पतझड़ के मौसम में लाये हो तुम बहारयह ज़िन्दगी ले आई है फिर उस मोर पेजहाँ मैं पूछती हूँ हर घडी ये सब सेतुम हो कौन कहाँ छुपाया है तुमने अपना वजूद?तुम जो भी हो मन को भा गए हो खूबजिस किताब से फीका पढ़ गया था प्यार का नूरशुक्रिया प्यार से रंग भरने का उसमेमेरे अनजाने हुज़ूर!
Thursday, 4 February 2010
तुम हो कौन?
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I just love this one. read it so many times again and again. and can't tell you its superb awesome.
ReplyDeleteYou rock!!!
yo. !!
ReplyDeletetruely awesome.
superb,fantablious,stupendos,great work :):)
y d way writn yourselv. !! lol ! kiddin yaar.!
------> hats off ___["""""]____ to u. !! ( hrez goez my hat. ).. hehe. !!
simply magnificient......... work. !!
keep goin,:):):)
तुम हो कौन?
ReplyDeleteजिसको याद करके मुस्कुराते हैं हम
एक अजीब रिश्ता है तुमसे
एक अजीब ख्वाइश जगाते हो तुम
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Caveman smiles at these words for him.