Thursday, 4 February 2010

तुम हो कौन?

तुम हो कौन?
जिसको याद करके मुस्कुराते हैं हम
एक अजीब रिश्ता है तुमसे
एक अजीब ख्वाइश जगाते हो तुम

प्यार भरी नज़र से जब देखते हैं आप
सब कुछ नज़र आता है साफ़ साफ़
जैसे ही लफ्ज़ खुलते हैं चालकाने को अलफ़ाज़
शब्दों की सुराही सूख जाती है बन के इक राज़

तुम हो कौन जाने कब पता चलेगा
क्या यह रिश्ता तब तक बना रहेगा?
आज ख़ुशी कहती है हम से
की यह मुस्कराहट जचती है तुम पे

बस यूँ ही रहना मेरे पास
और चेध्ते रहना वही प्यारा सा साज़
तुम्हारी हर एक बात को सुनाने का है इंतज़ार
अब पतझड़ के मौसम में लाये हो तुम बहार

यह ज़िन्दगी ले आई है फिर उस मोर पे
जहाँ मैं पूछती हूँ हर घडी ये सब से
तुम हो कौन कहाँ छुपाया है तुमने अपना वजूद?
तुम जो भी हो मन को भा गए हो खूब

जिस किताब से फीका पढ़ गया था प्यार का नूर
शुक्रिया प्यार से रंग भरने का उसमे
मेरे अनजाने हुज़ूर!

3 comments:

  1. I just love this one. read it so many times again and again. and can't tell you its superb awesome.
    You rock!!!

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  2. yo. !!
    truely awesome.
    superb,fantablious,stupendos,great work :):)




    y d way writn yourselv. !! lol ! kiddin yaar.!
    ------> hats off ___["""""]____ to u. !! ( hrez goez my hat. ).. hehe. !!
    simply magnificient......... work. !!
    keep goin,:):):)

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  3. तुम हो कौन?
    जिसको याद करके मुस्कुराते हैं हम
    एक अजीब रिश्ता है तुमसे
    एक अजीब ख्वाइश जगाते हो तुम

    ~~~~~~~~~

    Caveman smiles at these words for him.

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